उद्योग की पृष्ठभूमि
भारत में जैव-ऊर्जा, गाँव की बायोगैस से राष्ट्रीय अनिवार्यता तक।
चार दशकों की नीतियों ने बायोमास को ग्रामीण रसोई-ईंधन कार्यक्रम से भारत के ऊर्जा मिश्रण का एक स्थायी हिस्सा बना दिया — यही नीतिगत बदलाव बायोकोल, पेलेट्स और ब्रिकेट्स को औद्योगिक खरीदारों की पसंद में लाया। यह सफ़र कैसे तय हुआ, यहाँ देखें।
समयरेखा।
वे केंद्रीय योजनाएँ और नियम जिन्होंने जैव-ऊर्जा क्षेत्र को आज की स्थिति तक पहुँचाया।
- 1981–82राष्ट्रीय बायोगैस विकास परियोजना (NPBD) शुरू हुई — भारत का पहला बड़ा जैव-ऊर्जा कार्यक्रम, जिसने ग्रामीण भारत में परिवार-स्तर के बायोगैस संयंत्रों को सब्सिडी दी।
- 1982बायोगैस को प्रधानमंत्री के 20-सूत्री कार्यक्रम में शामिल किया गया और नए बने अपारंपरिक ऊर्जा स्रोत विभाग (DNES) के अधीन रखा गया।
- 1992DNES को पूर्ण केंद्रीय मंत्रालय — अपारंपरिक ऊर्जा स्रोत मंत्रालय (MNES) — का दर्जा मिला, और बायोमास बिजली व खोई सह-उत्पादन कार्यक्रम शुरू हुआ, जिसने भारत के पहले ग्रिड-से-जुड़े बायोमास बिजली संयंत्रों को सहयोग दिया।
- 2002–03NPBD का पुनर्गठन करके राष्ट्रीय बायोगैस और खाद प्रबंधन कार्यक्रम (NBMMP) बनाया गया।
- 2006MNES का नाम बदलकर नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) किया गया — यही नाम आज भी है।
- 2018जैव ईंधन पर राष्ट्रीय नीति अधिसूचित हुई, जिसमें एथेनॉल मिश्रण और बायोडीज़ल के लक्ष्य तय किए गए, और MNRE के तहत बायोमास-आधारित सह-उत्पादन कार्यक्रम फिर से शुरू हुआ।
- अक्टूबर 2018पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने SATAT योजना शुरू की, जिसका लक्ष्य हर साल 1.5 करोड़ टन उत्पादन करने वाले 5,000 कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) संयंत्र हैं।
- 2019प्रधानमंत्री JI-VAN योजना शुरू हुई, जो फ़सल अवशेष और अन्य लिग्नोसेल्युलोसिक बायोमास पर चलने वाले दूसरी पीढ़ी (2G) के एथेनॉल संयंत्रों को वित्तीय सहायता देती है।
- अक्टूबर 2021विद्युत मंत्रालय ने भारत की पहली बायोमास को-फ़ायरिंग नीति जारी की, जिसमें कोयला-आधारित बिजलीघरों से अपने ईंधन में बायोमास पेलेट्स मिलाने को कहा गया।
- मई 2022जैव ईंधन पर राष्ट्रीय नीति में संशोधन हुआ — 20% एथेनॉल मिश्रण का लक्ष्य 2030 से पहले करके 2025-26 कर दिया गया और पात्र कच्चे माल की सूची बढ़ाई गई।
- नवंबर 2022MNRE ने राष्ट्रीय जैव-ऊर्जा कार्यक्रम अधिसूचित किया, जिसमें अपशिष्ट से ऊर्जा, बायोमास और बायोगैस सहायता को ₹858 करोड़ के एक ही चरण-I परिव्यय के तहत जोड़ा गया।
- जून 2023बायोमास को-फ़ायरिंग नीति को अनिवार्य नियम में बदला गया — वित्त वर्ष 2024-25 से 5% को-फ़ायरिंग, जो वित्त वर्ष 2025-26 से बढ़कर 7% होगी।
- 2024CAQM अधिनियम के तहत फ़सल अवशेष जलाने पर जुर्माना बढ़ाकर प्रति घटना ₹30,000 तक किया गया, और प्रधानमंत्री JI-VAN योजना को कच्चे माल की बड़ी सूची के साथ 2028-29 तक बढ़ाया गया।
- अगस्त 2026केंद्रीय मंत्रिमंडल ने कंप्रेस्ड बायोगैस के लिए ₹23,731 करोड़ की एकीकृत राष्ट्रीय योजना GOBARdhan (वित्त वर्ष 2026-27–2035-36) को मंज़ूरी दी, जिसमें SATAT और संबंधित CBG सहायता को एक ढाँचे में जोड़ा गया।
नीति के पीछे के लोग।
ऊपर दी गई समयरेखा में दर्ज फ़ैसलों से जुड़े चार पदाधिकारी।
आर.के. सिंहविद्युत तथा नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री, 2017–2024
उनके मंत्रालयों ने राष्ट्रीय जैव-ऊर्जा कार्यक्रम (2022) अधिसूचित किया और कोयला बिजली संयंत्रों के लिए पहली बायोमास को-फ़ायरिंग अनिवार्यता जारी की।
धर्मेंद्र प्रधानपेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री, 2021 तक
अक्टूबर 2018 में कंप्रेस्ड बायोगैस पहल SATAT शुरू की, जिसका लक्ष्य देश भर में 5,000 CBG संयंत्र है।
हरदीप सिंह पुरीपेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री, 2021 से
फ़सल अवशेष से दूसरी पीढ़ी के एथेनॉल को सहायता देने वाली प्रधानमंत्री JI-VAN योजना के 2024 के विस्तार की देखरेख की।
नरेंद्र मोदीभारत के प्रधानमंत्री
2022 के जैव ईंधन नीति संशोधन और 2026 की GOBARdhan योजना को मंज़ूरी देने वाली केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठकों की अध्यक्षता की।
भारत सरकार की आधिकारिक तस्वीरें, जो पत्र सूचना कार्यालय (PIB) के माध्यम से गवर्नमेंट ओपन डेटा लाइसेंस – इंडिया (GODL) के तहत प्रकाशित हैं। इन्हें केवल तथ्यात्मक, ऐतिहासिक संदर्भ के लिए दिखाया गया है — A3 Energy एक स्वतंत्र निजी कंपनी है और चित्र में दिखाए गए व्यक्तियों या मंत्रालयों से संबद्ध नहीं है, न ही उनके द्वारा समर्थित है और न ही उनके विचारों का प्रतिनिधित्व करती है।
देखें कि A3 Energy इस समयरेखा में कहाँ फ़िट होती है।
हमारी कहानी पढ़ेंऊपर दिए गए आँकड़े और तारीख़ें सार्वजनिक स्रोतों से ली गई हैं — नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE), विद्युत मंत्रालय, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय तथा पत्र सूचना कार्यालय, भारत सरकार — और सितंबर 2026 तक की हैं। योजनाओं के परिव्यय, लक्ष्य और समय-सीमाएँ समय-समय पर बदलती रहती हैं; अभी लागू नियमों के लिए हमारा नीति और नियम पेज देखें, या अनुपालन या निवेश संबंधी फ़ैसले से पहले संबंधित मंत्रालय की आधिकारिक अधिसूचनाएँ जाँच लें।
